मिलावट घर पे चेक करें (Adulteration) Milawat

परिभाषा ( Definition  ) :
शुद्ध पदार्थों (तय मानकों के अनुसार ) में अशुद्ध, सस्ती अथवा अनावश्यक वस्तुओं के मिश्रण या कोई आवश्यक भाग को निकालना या कोई नुक़सान पहुंचाने वाली वश्तु को अलग न करने को  मिलावट कहते हैं। धनलोलुप और भ्रष्टाचारी व्यवसायियों द्वारा अधिक लाभ के लोभवश नाना प्रकार की युक्तियों से घटिया वस्तु को बढ़िया बताकर ऊँचे दाम पर बेचने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार का कुत्सित व्यापार समाज के सभी वर्गो में न्यूनाधिक मात्रा में व्याप्त है, जिससे जनता को उचित मूल्य देने पर भी घटिया खाद्य सामग्री मिलती है और उससे स्वास्थ्य की हानि भी होती है। 


परिचय (Introduction) :


खाद्य व्यवसायियों का यह अनैतिक एवं समाजविरोधी आचरण संसार के सभी देशों में पाया जाता है, किंतु अशिक्षित, निर्धन और अल्पविकसित देशों में यह अधिक देखने में आता है। दूध, घी, तेल, अन्न, आटा, चाय, काफी, शर्बत आदि महँगे तथा देहसंरक्षी पदार्थों (प्रोटेक्टिव फ़ूड्स) में अधिकतर अपद्रव्यीकरण किया जाता है जिससे उनकी उपयोगिता कम हो जाती है। इससे जनता को जो स्वास्थ्यहानि होती है उसको रोकना परम आवश्यक है। सदाचारपूर्ण नैतिक शिक्षा, अत्यंत उपयोगी साधन होते हुए भी अपद्रव्यीकरण रोकने में किसी देश में सफल सिद्ध नहीं हुई है। मानव स्वभावगत दोषों का अध्ययन करनेवाले न्यायशास्त्रियों का मत है कि खाद्य का अपद्रव्यीकरण रोकने के लिए कठोर दंडनीति अपनाना आवश्यक है। साधारण धनदंड सर्वथा अपर्याप्त है। भोजन को विषाक्त करनेवाला आततायी कहलाता है और 'नाततायी वधे दोष:' के अनुसार उसको दंड देना ही उचित है। इसी कारण ऐसे अपराधी के लिए धनदंड के अतिरिक्त अब कारादंड का भी विधान है। परंतु केवल दंडनीति से भी काम नहीं चलता। जनमत जागरण की भी आवश्यकता है।
दूध में जल, घी में वनस्पति घी अथवा चर्बी, महँगे और श्रेष्ठतर अन्नों में सस्ते और घटिया अन्नों आदि के मिश्रण को साधारणत: मिलावट या अपमिश्रण कहते हैं। किंतु मिश्रण के बिना भी शुद्ध खाद्य को विकृत अथवा हानिकर किया जा सकता है और उसके पौष्टिक मान (फूड वैल्यू) को गिराया जा सकता है। दूध से मक्खन का कुछ अंश निकालकर उसे शुद्ध दूध के रूप में बेचना, अथवा एक बार प्रयुक्त चाय की साररहित पत्तियों को सुखाकर पुन: बेचना मिश्रणरहित अपद्रव्यीकरण के उदाहरण हैं। इसी प्रकार बिना किसी मिलावट के घटिया वस्तु को शुद्ध एवं विशेष गुणकारी घोषित कर झूठे दावे सहित आकर्षक नाम देकर जनता को ठगा जा सकता है। इस कारण 'मिलावट' अथवा 'मिश्रण' जैसे शब्द खाद्यविकारी कार्यो के लिए पूर्ण रूप से सार्थक नहीं हैं। खाद्य पदार्थ के उत्पादन, निर्माण, संचय, वितरण, वेष्टन, विक्रय आदि से संबंधित वे सभी कुत्सित कार्य, जो उसके स्वाभाविक गुण, सारतत्व अथवा श्रेष्ठता को कम करनेवाले हैं, अथवा जिनसे ग्राहक के स्वास्थ्य की हानि और उसके ठगे जाने की संभावना रहती है, अपद्रव्यीकरण या अपनामकरण (मिसब्रैंडिंग) द्वारा सूचित किए जाते हैं। जनस्वास्थ्य तथा न्यायविधान की दृष्टि में ये शब्द बहुत व्यापक अर्थ के द्योतक हैं।

शुद्ध पदार्थ  और मिलावटी तत्व :


खाद्यपदार्थों में मिलावट 
दूध और दूध से बने पदार्थ में मिलावट : क्लिक करें 
- पानी की मिलावट की जाँच
- स्टार्च की मिलावट की जाँच
- वनस्पति तेल की मिलावट जाँच
- फोर्मलिन की मिलावट की जाँच 
घी, 
तेल, 
अन्न, 
आटा, 
चाय, काफी, 
शर्बत, 
केसर ,
मेटल्स में मिलावट 
सोने, 
चाँदी , 
चमड़े से बने सामानों में मिलावट 
चमड़े के जूते, 
चमड़े के बैग 
बिल्डिंग मटेरियल्स
कपड़े में मिलावट 


मिलावट के विरुद्ध कानून


खाद्य पदार्थ के अपद्रव्यीकरण द्वारा जनता की स्वास्थ्यहानि को रोकने के लिए प्रत्येक देश में आवश्यक कानून बनाए गए हैं। भारत के प्रत्येक प्रदेश में शुद्ध खाद्य संबंधी आवश्यक कानून थे, किंतु भारत सरकार ने सभी प्रादेशिक कानूनों में एकरूपता लाने की आवश्यकता का अनुभव कर, देश-विदेशों में प्रचलित काननों का समुचित अध्ययन कर, सन्‌ 1954 में खाद्य-अपद्रव्यीकरण-निवारक अधिनियम (प्रिवेंशन ऑव फ़ूड ऐडल्टरेशन ऐक्ट) समस्त देश में लागू किया और सन्‌ 1955 में इसके अंतर्गत आवश्यक नियम बनाकर जारी किए। इस कानून द्वारा अपद्रव्यीकरण तथा झूठे नाम से खाद्यों का बेचना दंडनीय है।




खाद्य अपमिश्रण जाँच के आसान परीक्षण


शरीर के पोषण के लिये एक व्यक्ति को विभिन्न भोज्य/खाद्य पदार्थों की रोज आवश्यकता है जिसके लिए सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आय का लगभग 50 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है। अधिकाशत: परिवार अपने खाद्य पदार्थों में पोषण तत्वों के प्रति सजग रहते हैं। प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट विटामिन तथा खनिज लवण आदि को आहार में शामिल करना आवश्यक है तथा ये सभी पोषक तत्व खाद्य सामग्री द्वारा ही प्राप्त किये जा सकते हैं। यह तभी संभव है जब बाजार में मिलने वाला खाद्य पदार्थ (दालें, अनाज, दूध, मिठाई, मसाले, तेल आदि) मिलावट रहित हों। अपमिश्रित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता काफी कम हो जाती है क्योंकि इसमें सस्ते पदार्थ जैसे रंग इत्यादि मिला दिये जाते हैं। इन्हें मिलाने से उत्पाद तो आकर्षक दिखने लगता है जिससे बिक्री ज्यादा होती है परन्तु उनकी पोषकता प्रभावित होती है व स्वास्थ्य के लिये हानिकारक सिध्द होते हैं।
सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे गेहूँ, आटा, दूध, शहद, दालें, मसाले, चाय पत्ती, मेवे, इत्यादि में इस तरह मिलावट की जाती है कि मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावट वाले खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावट युक्त आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा शरीर में विकार उत्पन्न होने की सम्भावना बढ़ जाती है। अपभोक्ता को आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ता है। खाद्य पदार्थों को उपयोग करने से पूर्व यदि मिलावट की जाँच हो जाये तो उपभोक्ता काफी हद तक स्वास्थ्य सबंधित समस्याओं से बच सकता है।
क्या है खाद्य अपमिश्रण ?
यदि किसी भोज्य पदार्थ में कोई बाहरी तत्व मिला दिया जाए या उसमें से कोई अभिन्न तत्व निकाल लिया जाए, उसे अनुचित ढंग से संग्रहीत किया जाए या दूषित स्त्रोत से प्राप्त किया जाये तथा उसकी गुणवत्ता में कमी आ गयी हो तो उस खाद्य सामग्री या भोज्य पदार्थ को मिलावटयुक्त भोज्य पदार्थ कहा जाता है।

खाद्य अपमिश्रण क्यों ?
प्रत्येक व्यक्ति अपने शरीर के पोषण के लिये आहार के रूप में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बाजार से खरीदता है। कई दुकानदार अपने स्वार्थवश लालच में आकर खाद्य पदार्थों में मिलावट कर देते हैं। जैसे - दूध में पानी मिलाकर बेचना, मसालों में गेरू रंग इत्यादि का मिलाना। इस प्रकार की मिलावट करने से उपभोक्ता को खाद्य पदार्थों में से मिलने वाले पोषक तत्व पूर्ण मात्रा में नहीं मिल पाते हैं तथा मिलावट युक्त आहार ग्रहण करने से शरीर भी विकारयुक्त हो सकता है। कभी-कभी सरंक्षण एवं संग्रह की अनुचित विधियों को अपनाने से भी भोज्य पदार्थ सही प्रकार से उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं हो पाता है।

अपमिश्रक (मिलावटी पदार्थ) तथा उनका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव : 
सामान्य रूप से भोज्य पदार्थों में मिलावट लाभ कमाने के लिये की जाती है। उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी जरूर होनी चाहिये कि खाद्य पदार्थों में किस प्रकार की मिलावट की जाती है। तथा इसे कैसे जाँचा जा सकता है ?
खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत: रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छांछ, शहद, हल्दी, मिर्च पाउडर, धनिया, घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, खोया, आटा आदि में मिलावट की जा सकती है। भिन्न प्रकार की मिलावट के प्रतिकूल प्रभाव भी भिन्न होते हैं। प्रस्तुत सारणी में खाद्य पदार्थों में सभांवित मिलावटी पदार्थ तथा उनसे होने वाली बीमारियों के नाम इंगित है।

क्र.सं.भोज्य पदार्थमिलावटी पदार्थस्वास्थ्य पर प्रभाव
1.  खाद्यान्न/दालें/गुड़/मसाले  कंकड़, पत्थर, रेत, मिट्टी, लकड़ी का बुरादा  आहार तन्त्र के रोग, दाँत व ऑंत प्रभावित
2.  चने/अरहर की दाल  खेसारी/केसरी दाल  स्वास्थ्य प्रभावित (लैथीरस रूग्णता)
3.  सरसों का तेल  आर्जिमोन तेल  ऐपिडेमिक ड्रॉफ्सी (आहार तन्त्र प्रभावित, अनियंत्रित ज्वर)
4.  बेसन, हल्दी  पीला रंग (मैटानिल)  प्रजनन तंत्र प्रभावित, पाचन तंत्र, यकृत व गुर्दे प्रभावित
5.  लाल मिर्च  रोडामाइन-बी  यकृत, गुर्दे, तिल्ली प्रभावित
6.  दालें  टेलकॅम पाउडर एस्बेस्टॉस पाउडर  पाचन तंत्र प्रभावित, गुर्दे में पथरी की सम्भावना
7.  वर्क  एल्यूमिनियम  पेट सम्बन्धित बीमारी
8.  काली मिर्च  पपीते के बीज  स्वास्थ्य संबंधी
9.  नमक  मिट्टी/रेत  गले संबंन्धित बीमारी 
10.  चाय पत्ती  लौह चूर्ण/रंग  आहार तंत्र, पाचन तंत्र प्रभावित
11.  दूध  पानी/यूरिया/रंग/वांशिग पाउडर  स्वास्थ्य संबधी बीमारी
12.  घीं  चर्बी  स्वास्थ्य संबधी बीमारी
13.  मेवा  अरारोट, चीनी  स्वास्थ्य संबधी बीमारी
मिलावट की जाँच कैसे करें ?
      खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच करना बहुत ही आसान है। इसकी जाँच के सरल व घरेलू तरीके हैं जिससे कोई भी उपभोक्ता आसानी से खाद्य पदार्थों की शुध्दता की जाँच कर सकता है। खाद्य पदार्थों में मिलावट को जाँचने के लिये आसान व घरेलू परीक्षणों का संक्षिप्त विवरण अग्रलिखित है।
खाद्य पदार्थ का नाममिलावटी पदार्थ का नामअपमिश्रण की जाँच के सरल परीक्षण
  मिर्च पाउडर                      ईंट या बालू का चूर्ण,                                                एक चम्मच मिर्च पाउडर को पानी भरे ग्लास में डालें। पानी रंगीन हो जाता है, तो मिर्च पाउडर मिलावटी है। उसमें ईंट या बालू का चूर्ण होगा, तो वह पेंदी में बैठ जाएगा। अगर सफेद रंग का झाग दिखे, तो उसमें सेलखड़ी की मिलावट है।
  मावा  स्टार्चमावा में स्टार्च की उपस्थिति को जांचने के लिए इसकी थोड़ी मात्रा में पानी मिलाकर इस मिश्रण को उबालें। फिर इसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। यदि नीले रंग की परत दिखे, तो साफ है कि उसमें स्टार्च मौजूद है।
  हल्दी  रंगएक चम्मच हल्दी को एक परखनली में डालकर उसमें सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें। बैंगनी रंग दिखता है और मिश्रण में पानी डालने पर यह रंग गायब हो जाता है, तो हल्दी असली है। लेकिन रंग बना रहता है, तो वह मिलावटी हल्दी है।
  खाने का तेल  आर्जीमोन की उपस्थितिसैंपल में सांद्र नाइट्रिक एसिड मिलाकर मिश्रण को खूब हिलाएं। थोड़ी देर बाद एसिड की परत में अगर लाल-भूरे रंग की परत दिखाई दे, तो यह आर्जीमोन तेल की मौजूदगी का द्योतक है।
  चांदी के वर्क  एल्युमिनियमचांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट की आसानी से जांच की जा सकती है। क्योंकि चांदी के वर्क को जलाने से वह उतने ही भार की छोटी-सी गेंद के रूप में परिणत हो जाती है, जबकि मिलावट वाली चांदी को जलाने के बाद गहरे ग्रे रंग का अवशेष बच जाता है।
  चावल  रंगचावल में मिलावट की जांच करने के लिए दोनों हाथों से चावल की कुछ मात्रा को रगड़ें। यदि इसमें पीला रंग होगा, तो हाथों में लग जाएगा। चावल को पानी में भिगोएं और उसमें सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें। पानी का रंग बैंगनी हो जाए, तो उसमें पीला रंग मिला हुआ है।
  आटा  फीका स्वादअगर आटा गूंधने में अधिक पानी लगता है, इससे बनी हुई रोटियां अच्छी तरह फूलती हैं और इनका स्वाद मिठास लिए होता है, तो आटा शुध्द है। इसके विपरीत मिलावटी आटे की रोटियों का स्वाद फीका होता है।
  सरसों  आर्जीमोनसरसों के बीज चिकने होते हैं। आर्जीमोन के बीज की सतह खुरदरी होती है तथा ये काले रंग के होते हैं। इसलिए इस तरह का फर्क करके आसानी से दोनों बीजों को अलग-अलग किया जा सकता है।
  चाय-पत्ती  रंगचाय पत्ती की शुध्दता की जांच के लिए चीनी-मिट्टी के किसी बरतन या शीशे के प्लेट पर नींबू का रस डालकर उस पर चाय पत्ती का थोड़ा सा बुरादा डाल दें। यदि नींबू के रस का रंग नारंगी या दूसरे रंग का हो जाता है, तो इसमें मिलावट है। यदि चाय पत्ति असली है, तो हरा मिश्रित पीला रंग दिखाई देगा।
  शहद  चीनी और पानीरूई के फाहे को शहद में भिगोकर उसे माचिस की तीली से जलाएं। यदि शहद में चीनी और पानी का मिश्रण है, तो रूई का फाहा नहीं जलेगा और यदि शहद शुध्द है, तो चटक की आवाज के साथ जल उठेगा।
  केसर  असली और नकलीअसली और नकली केसर की पहचान आसानी से की जा सकती है। मकई के टुकड़े को सुखाकर, इसमें चीनी मिलाकर कोलतार डाई से बनाया जाने वाला नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोड़ने लगता है। असली केसर को पानी में घंटों रख देने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।
  नमक  मिट्टी/रेतनमक की कुछ मात्रा लेकर काँच के साफ गिलास में पानी लेकर घोल लें तथा कुछ समय के लिए उसे स्थिर रहने दें, इसके बाद यदि गिलास की तली में रेत या मिट्टी बैठ जाए तो समझ लेना चाहिए कि नमक में मिलावट है।
  कॉफी  खजूर/इमली के बीजकॉफी पाउडर को गीले ब्लॉटिंग पेपर पर छिड़क लें इसके उपर पोटेशियम हाइड्रोक्साइड की कुछ बूंदे डालें यदि कॉफी के आस-पास उसका रंग भूरा हो जाय तो समझ लेना चाहिए कि उसमें मिलावट है।
  चने/अरहर की दाल           खेसारी दाल/मेटानिल पीला रंग                  
दाल को एक परखनली में डालकर उसमें पानी डालें तथा हल्के हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें हिलाने पर यदि घोल का रंग गहरा लाल हो जाय तो समझना चाहिए कि दाल को मेटानिल पीले रंग से रंगा गया है। खेसारी दाल का परीक्षण दाल को ध्यानपूर्वक देख कर किया जा सकता है। खेसारी दाल नुकीली एवं धंसे हुए आकार की होती है।
  काली मिर्च  पपीते के बीजकाली मिर्च को पानी में डाल दें यदि पपीते के बीज हैं तो वह पानी में तैर जायेंगें और काली मिर्च डूब जायेगी।
  हींगशुध्द हींग को लौ पर जलाने से लौ चमकीली हो जाती है। हींग को साफ पानी में धोने पर यदि हींग का रंग सफेद या दूधिया हो जाये तो हींग शुध्द होती है।
  दूध  पानीलैक्टोमीटर द्वार सापेक्षिक घनत्व को ज्ञात करके दूध की शुध्दता की जाँच की जा सकती है। शुध्द दूध का सापेक्षिक घनत्व 1.030 से 1.034 तक होना चाहिए।
  मक्खन/घीं  वनस्पति घींहाइड्रोक्लोरिक अम्ल (10 सी. सी.) तथा एक चम्मच चीनी मिलायें तथा इस मिश्रण में 10 सी. सी. घीं या मक्खन मिलायें। इसे अच्छी तरह हिलायें यदि मिलावट होगी तो मिश्रण का रंग लाल हो जायेगा। 
खाद्य अपमिश्रण एक अपराध है। यह खाद्य अपमिश्रण अधिनियम (Prevention of Food Adultration Act.1954)  संस्था द्वारा 1954 में घोषित किया गया। इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी भी व्यापारी/विक्रेता को अपराधी पाये जाने पर कम से कम 6 महीने की जेल हो सकती है। चूंकि खाद्य पदार्थों में मिलावट मानव स्वास्थ्य से संबधित है, सभी लोगों को इसके प्रति जागरूक होना चाहिये।


प्रत्येक उपभोक्ता (विशेषकर गृहणियों) को मिलावटी पदार्थों से बचने हेतु जागरूक होना चाहिये। इसके लिये उपभोक्ता को चाहिये कि वे खुली खाद्य सामग्री न खरीदें। हमेशा सील बन्द तथा डिब्बे वाली खाद्य सामग्री ही खरीदें। हमेशा मानक प्रमाण चिह्न (एगमार्क, एफ.पी.ओ., हालमार्क) अंकित सामग्री खरीदें तथा खरीदे जाने वाली सामग्री के गुणों, रंग, शुध्दता आदि की समुचित जानकारी रखें।
मिलावट



दूध में फोर्मलिन की जाँच :


दो चम्मच दूध में दो तीन बून्द सल्फ्यूरिक एसिड डालें।
यदि दूध के ऊपर नीले रंग का छल्ला सा बना दिखाई दे तो यह दूध में फोर्मलिन मिलाया गया होता है। फोर्मलिन मिलाने से दूध जल्दी ख़राब
नहीं होता। इसलिए कई डेरी इसका यूज़ कर लेती है।

इसके अलावा डिफेंस फूड रिसर्च लेबोरेट्री  ( DFRL ) ने दूध की जाँच के लिए एक किट विकसित किया है जिससे दूध में हर प्रकार की
मिलावट की जाँच की जा सकती है। इस किट का नाम टेस्टो मिल्क है। यह आसानी से यूज़ किया जा सकने वाला स्ट्रिप बेस्ड टेस्ट किट है।
दूध में साथ में दी गई स्ट्रिप डालने से मिलावट का पता चल जाता है।

मिलावट के विरोध में यदि क़ानूनी कार्यवाही करनी हो तो आपको कानूनी रूप से मान्यता वाली अनुमोदित टेस्टिंग लैबोरेटरी से  जाँच

करवाकर रिपोर्ट लेनी होती है । जहाँ साइंटिफिक तरीकों से जाँच करके रिपोर्ट बनाई जाती है।

शहद में मिलावट की पहचान

मिलावट
—  शहद की जाँच करने के लिए रुई की बत्ती बना कर शहद में डुबोकर जलाएं। यदि चटक कर बत्ती जल जाये तो शहद असली है , यदि
बत्ती  नहीं जलती है शहद में  मिलावट की गई है ।
—  एक घर की मक्खी पकड़ कर शहद में डुबो दें। यह बाहर निकल कर उड़ जाये तो शहद असली है। मक्खी उड़ नहीं पाये तो शहद
मिलावटी समझें।
—  एक कांच के गिलास में पानी भरकर उसमे शहद की एक बूँद डालें। यही यह बूँद सीधी जाकर नीचे बैठ जाये तो शहद असली है।
यदि यह तली में पहुंचने से पहले ही घुल जाये या नीचे पहुंच कर तुरंत फ़ैल जाये तो शहद मिलावटी होता है।

शक्कर में मिलावट की पहचान


शक्कर में चॉक पाउडर , यूरिया , आदि मिले हो सकते है।
—  दो  चम्मच  शक्कर को एक कप पानी में डालकर गर्म करें यदि इसमें चॉक पाउडर होगा तो नीचे दिखाई देगा।
—  शक्कर को पानी में डालने पर अमोनिया की बदबू आती है तो इसका मतलब है की शक्कर में यूरिया की मिलावट मौजूद है।
—  एक कप पानी में एक चम्मच शक्कर घोल लें। इसमें तीन चार बून्द हाइड्रोक्लोरिक एसिड की डालें। यदि गुलाबी रंग दिखाई दे। तो शक्कर
को अशुद्ध समझना चाहिए।

दाल में रंग की पहचान


दाल में लेड क्रोमेट की मिला हो सकता है। इसकी जाँच करने के लिए एक चम्मच दाल में एक चम्मच पानी डालें। कुछ बून्द हाइड्रोक्लोरिक
एसिड की डालें। यदि गुलाबी रंग दिखाई दे तो इसका मतलब इसमें लेड क्रोमेट मिलाया गया है। यदि गहरा लाल रंग दिखाई दे तो इसका
मतलब है दाल में मेटानिल नामक रंग मिलाया गया है।

चावल में  मिलावट की पहचान


चावल में  जाँच करने के लिए चावल को हाथ में लेकर रगड़ें। यदि हाथ में रंग दिखाई देना रंग चढ़ाये जाने का संकेत होता  है। एक चम्मच
चावल में एक दो चम्मच पानी मिलाएं। इसमें कुछ बून्द हाइड्रोक्लोरिक एसिड की डालें। यदि पीला रंग दिखाई दे तो चावल में मिलावट की

गई है ऐसा समझना चाहिए।

घी में मिलावट की पहचान


शुद्ध देसी घी में वनस्पति घी , आलू या स्टार्च की मिलावट हो सकती है। वनस्पति घी चेक करने के लिए एक कप में एक चम्मच घी लें
इसमें एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिला दें। पांच मिनट बाद देखें। यदि लाल रंग दिखाई दे तो घी मिलावट वाला समझना चाहिए।
आलू या स्टार्च की जाँच के लिए घी में आयोडीन की कुछ बून्द डालें। यदि नीला रंग दिखाई दे तो समझ जाना चाहिए की घी में आलू या स्टार्च
मिला हुआ है।
पश्मीना साल 

आदि महँगे तथा देहसंरक्षी पदार्थों (प्रोटेक्टिव फ़ूड्स) में अधिकतर अपद्रव्यीकरण किया जाता है जिससे उनकी उपयोगिता कम हो जाती है। इससे जनता को जो स्वास्थ्यहानि होती है उसको रोकना परम आवश्यक है। सदाचारपूर्ण नैतिक शिक्षा, अत्यंत उपयोगी साधन होते हुए भी अपद्रव्यीकरण रोकने में किसी देश में सफल सिद्ध नहीं हुई है। मानव स्वभावगत दोषों का अध्ययन करनेवाले न्यायशास्त्रियों का मत है कि खाद्य का अपद्रव्यीकरण रोकने के लिए कठोर दंडनीति अपनाना आवश्यक है। साधारण धनदंड सर्वथा अपर्याप्त है। भोजन को विषाक्त करनेवाला आततायी कहलाता है और 'नाततायी वधे दोष:' के अनुसार उसको दंड देना ही उचित है। इसी कारण ऐसे अपराधी के लिए धनदंड के अतिरिक्त अब कारादंड का भी विधान है। परंतु केवल दंडनीति से भी काम नहीं चलता। जनमत जागरण की भी आवश्यकता है।
दूध में जल, घी में वनस्पति घी अथवा चर्बी, महँगे और श्रेष्ठतर अन्नों में सस्ते और घटिया अन्नों आदि के मिश्रण को साधारणत: मिलावट या अपमिश्रण कहते हैं। किंतु मिश्रण के बिना भी शुद्ध खाद्य को विकृत अथवा हानिकर किया जा सकता है और उसके पौष्टिक मान (फूड वैल्यू) को गिराया जा सकता है। दूध से मक्खन का कुछ अंश निकालकर उसे शुद्ध दूध के रूप में बेचना, अथवा एक बार प्रयुक्त चाय की साररहित पत्तियों को सुखाकर पुन: बेचना मिश्रणरहित अपद्रव्यीकरण के उदाहरण हैं। इसी प्रकार बिना किसी मिलावट के घटिया वस्तु को शुद्ध एवं विशेष गुणकारी घोषित कर झूठे दावे सहित आकर्षक नाम देकर जनता को ठगा जा सकता है। इस कारण 'मिलावट' अथवा 'मिश्रण' जैसे शब्द खाद्यविकारी कार्यो के लिए पूर्ण रूप से सार्थक नहीं हैं। खाद्य पदार्थ के उत्पादन, निर्माण, संचय, वितरण, वेष्टन, विक्रय आदि से संबंधित वे सभी कुत्सित कार्य, जो उसके स्वाभाविक गुण, सारतत्व अथवा श्रेष्ठता को कम करनेवाले हैं, अथवा जिनसे ग्राहक के स्वास्थ्य की हानि और उसके ठगे जाने की संभावना रहती है, अपद्रव्यीकरण या अपनामकरण (मिसब्रैंडिंग) द्वारा सूचित किए जाते हैं। जनस्वास्थ्य तथा न्यायविधान की दृष्टि में ये शब्द बहुत व्यापक अर्थ के द्योतक हैं।

No comments:

Post a Comment